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पैसे से ज्यादा वस्तु,वस्तु से ज्यादा व्यक्ति,व्यक्ति से ज्यादा परमात्मा से प्रेम करे, , ,, कीर्तन प्रिय दास स्वामी,,

पैसे से ज्यादा वस्तु,वस्तु से ज्यादा व्यक्ति,व्यक्ति से ज्यादा परमात्मा से प्रेम करे, , ,, कीर्तन प्रिय दास स्वामी,,

अग्रवाल धर्मशाला में हुआ सत्संग सरिता का आयोजन,

खण्डवा।। हम व्यक्ति से प्रेम करने की जगह वस्तु से अधिक प्रेम करते हैं।इनकम बढ़ती जा रही है पर परिवार टूटते जा रहे हैं।पति पत्नि के रिश्तों में दरार आ रही है समझने की शक्ति कम हो रही है।दुनिया पैसे के पीछे भाग रही है।पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव हमारे देश मे पड़ रहा है। उपरोक्त उद्गार श्री स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट संस्थान शाखा सूरत गुरुकुल के कीर्तनप्रिय दास स्वामी ने सत्संग समिति द्वारा नागौरी परिवार, बंसल परिवार एवं तिवारी परिवार के सहयोग से अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित सत्संग सरिता कार्यक्रम में व्यक्त करते हुए कहा कि हम पैसे से अधिक वस्तु से प्रेम करे ,वस्तु से अधिक व्यक्ति से व व्यक्ति से अधिक परमात्मा से प्रेम करे। इस मनुष्य जीवन में प्रभु का नाम का स्मरण करना चाहिए जिससे हम जीवन मरण के फेर से बच जाएंगे और मुक्ति भी प्राप्त होगी, प्रवक्ता नारायण बाहेती व सुनील जैन ने बताया कि अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित सत्संग सरिता में लखनलाल नागौरी,राजेन्द्र बंसल ,मधुसूदन तिवारी व परिवारजनो ने ठाकुर स्वामी नारायण जी ठाकुर जी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर सूरत से पधारे कीर्तन प्रिय दास स्वामी, अनन्त प्रिय दास स्वामी,भजन प्रिय दास स्वामी जी का पुष्पमाला से स्वागत किया। सुनील जैन ने बताया कि अनंत प्रिय दास स्वामी ने संगत का परिचय कराया। कीर्तनप्रिय दास स्वामी ने संस्था की जानकारी देते हुए सभी को पधारने का आमन्त्रण दिया। कीर्तनप्रिय दास स्वामीजी ने कहाकि जिसने संत, माता -पिता का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया वह दुनिया में कभी नहीं हारते। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से परमात्मा में विश्वास की बात कही। ठाकुर जी की आरती की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विभिन्न समाजजन,वैश्य महासम्मेलन, विभिन्न समाज सेवी संगठन,व्यापारी,शहर के गणमान्यजन महिला,पुरुष , सत्संग व धर्म प्रेमी जन उपस्थित हुए, अंत में भगवान गोपाल कृष्ण की आरती की गई जिसमें लखन लाल नागोरी, सुनील बंसल,अखिलेश गुप्ता, अनिल मित्तल, सुनील जैन, नारायण बाहेती, गोरधन अग्रवाल सहित श्रद्धालु एवं मातृशक्ति उपस्थित थी, लखनलाल नागौरी ने सत्संग सरिता में उपस्थित सभी का आभार माना।

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